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05.03.2012
 
बरसात
शबनम शर्मा

कक्षा में हिन्दी का पीरियड लगा हुआ था। अचानक बिजली चली गई। पढ़ने के लिए जितनी रौशनी आ रही थी वह काफी नहीं थी। मैंने बच्चों से कहा चलो आँखें बन्द करके सब बच्चे बरसात के बारे में १०-१० लाइनें सोचो और एक-एक करके बोलो। बच्चे चुपचाप बैठ गये। कुछ देर बाद बच्चों ने बचकाने जवाब दिये जैसे उन्हें भीगना अच्छा लगता है। माँ पकवान बनाती है और वो खाते हैं। प्रकृति हरी-भरी हो जाती है। कपड़े भीगने पर उन्हें मार पड़ती है, मौसम ठंडा हो जाता है। परन्तु सतीश का जवाब सबसे अलग था, बोला, “मैम, मुझे बरसात अच्छी नहीं लगती। बारिश में मेरा घर टपकने लगता है और हम सामान इधर-उधर खिसकाकर थक जाते हैं, सामान भीग जाता है, सो भी नहीं पाते।मन छटपटा उठा, वाह री, गरीबों व अमीरों की बरसात।


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