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ISSN 2292-9754

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03.23.2016


प्रेम में होना

प्रेम में होना या प्रेम करना
कह देने भर से नहीं होता
प्रेम तो बसता है यादों में
जो पल पल टीसता है
दर्द में बसता है प्रेम

एक ख़्वाब जैसा होता है प्रेम
जिसे पाया नहीं जाता
खोकर पाया जाता है
इसे जीता नहीं जाता
हारकर जीता जाता है
त्याग में होता है प्रेम

समर्पण नहीं माँगता
समर्पित होकर पाया जाता है
कुछ पल का नहीं
युगों तक साथ निभाता है
अमर होता है प्रेम
हर दिल में जीवित रहता है

क्यूँकि आदि, इति,
स्वार्थ, झूठ में नहीं
सच्चाई में बसता है प्रेम
महसूस करके देखिये
किसी को प्रेम से
अपना बना कर तो देखिये
प्रेम तो सिर्फ़ प्रेम में होता है
सिर्फ़ प्रेम में…!!!


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