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ISSN 2292-9754

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03.23.2016


मौन

ये मौन बहुत बातें करता है
कितना वाचाल हो उठा है आजकल
बोलता रहता है अंतर्मन से
हर समय
दुनियां जहान की बातें
करता रहता है

नीले आकाश में उड़ती
वह चिड़िया भी ठिठक गयी देखो
कुछ पल को
हमारी बातें सुनने को
बेचारी नहीं समझ पाती हमारी भाषा
न हमारे मन को
फिर करने लगती आकाश से बातें
और मैं तुमसे

हाँ तुम ही तो समझ सकते हो
तुम से तो जुड़े हैं मन के तार
चलता रहता है निरंतर
वार्तालाप
देखो कैसे मुखर हो उठा है मौन
मौन होकर भी मौन नहीं है!!


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