अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
10.16.2014


महसूस

कहाँ जताया जाता है हर वक्त
ज़रूरत भी कहाँ होती है
जताने की बताने की
सुनाने की
जब समझ लेते हो बिन कहे ही
सबकुछ
हम तो महसूस ही कर लेते हैं
तुम्हें हर पल अपने आसपास
हर आती जाती साँस के साथ
रोम रोम में सिहरन के साथ
नीद में हर ख़्वाब के साथ
जागते ही अपनी हथेलियों
को चूम कर
दिल में छुपा लेती हूँ
जब भी मन बेचैन होता है
एक नज़र झाँक कर देख लेती हूँ
यूँ ही दिनभर तुम्हें महसूस करते हुए
अपनी पलकों में सहेज लेती हूँ
एक ख़्वाब की तरह सजाकर !!


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें