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ISSN 2292-9754

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10.31.2014


टूटा दिल

 इन्तहां हो गयी, हद से पार
इंसान कितना गिर गया
खेल समझता है दूसरों के जीवन को
और खिलौना दिल को
वो भी मिट्टी का
जब तक मन किया खेला
फिर तोड़कर फ़ेंक दिया
टूट गया दिल, बिना आवाज़
मिल गया मिट्टी में
बिखर गया चारों ओर
आँखे झर झर झरने लगी
सावन की बदरी सी
बरखा आई बादल गरजे
बरस गए झमाझम
पूरी धरा महक उठी
सोंधी सोंधी गंध से
अंकुरित हो आई धरती
टूट कर बिखरे दिल पर भी
फूटे अंकुर
वहाँ पड़े थे बीज
दर्द और आह के
तड़प और बैचेनी के भी थे कुछ
एक दिन गुज़र गया अनजाने में
वह बेवफ़ा प्रेमी उन राहों से
चुभ गए वे अंकुरण जूते पहने पाँव के भीतर तक
एक हूक सी उठी उसके सीने में
बहने लगे आँसू
कुछ बेचैनी और तड़प महसूस की
बैठ गया पेड़ की छाँव तले
एक मदमस्त हवा का झोंका आया
निकल गया सहलाते हुए बालों को
सच्चे प्यार का दर्द आज महसूसा था
टूटे दिल के अंकुरण उसे
सच्चे प्यार का अहसास करा गये थे
अब कुछ नहीं बचा था
टूट कर सब बिखर चुका था
बचा था तो
खाली हाथ और सूना दिल!!


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