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05.03.2008
 

परियों की शहजादी
सीमा सचदेव


मैं शहजादी परियों की
आसमान में मेरा घर
राहो में मेरी बिछे सितारे
मेरा पता है चाँद नगर

मै कलियों सी सुन्दर कोमल
चाहूँ जहाँ पे जाती हूँ
हवा के संग मैं बातें करती
नीलगगन में उड़ती हूँ

हरी भरी धरती को देखूँ
आसमान में बादल को
देखूँ नदिया झरने पर्वत
और पेड़ों की हलचल को

कुदरत का संगीत मैं सुनती
देखूँ इसकी सुन्दरता
फूलों से खुशबू लेती हूँ
और भँवरों से चंचलता

नन्हें बच्चे मुझको भाते
और भाता है भोलापन
न दुनियादारी न झँझट
कितना प्यारा यह बचपन

मन में मैल नहीं बच्चों के
न ही कुछ खोने का डर
राहों में मेरी बिछे सितारे
मेरा पता है चाँद नगर


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