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ISSN 2292-9754

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03.14.2016


उसका चहरा नज़र में आता है

उसका चहरा नज़र में आता है,
कितनी ख़ामोशियाँ सुनाता है।

चाहतें भी बदलती रहती हैं,
दिल भी शीशा है टूट जाता है।

ख़ुशबुएँ मुझको घेर लेती हैं,
याद जब भी कभी वो आता है।

रोज़ उठता है रोशनी लेकर,
रोज़ अँधेरे भी छोड़ जाता है।

मंज़िलों के क़रीब आ-आकर,
रास्ता भूल-भूल जाता है।


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