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ISSN 2292-9754

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03.14.2016


तुम चाहो तो

एक अधूरे गीत का
मुखड़ा मात्र हूँ,
तुम चाहो तो
छेड़ दो कोई तार सुर का
एक मधुर संगीत में
मै ढल जाऊँगा ......

ख़ामोश लब पे
ख़ुश्क मरुस्थल सा जमा हूँ
तुम चाहो तो
एक नाज़ुक स्पर्श का
बस दान दे दो
एक तरल धार बन
मै फिसल जाऊँगा......

भटक रहा बेजान
रूह की मनोकामना सा
तुम चाहो तो
हर्फ़ बन जाओ दुआ का
ईश्वर के आशीर्वाद सा
मैं फल जाऊँगा.....

राख बनके अस्थियों की
तिल तिल मिट रहा हूँ
तुम चाहो तो
थाम ऊँगली बस
एक दुलार दे दो
बन के शिशु
मातृत्व की ममता में
मै पल जाऊँगा .....


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