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| 05.31.2008 |
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तन्हाई |
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काँटों की चुभन सी क्यों है तन्हाई, ये नज़रें जहाँ तक मुझको ले जायें, इस दिल की अगन पहले क्या कम थी, आँसू जो छुपाने लगता हूँ सबसे, तुझे दिल से भुलाना चाहता हूँ, एक पल चैन से सोना चाहता हूँ, तन्हाई से दूर नहीं अब रह सकता, मेरी साँसों में, इन आहों में, |
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