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| 03.15.2009 |
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मेरी उम्मीदों को नाकाम ना होने देना |
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ज़िंदगी की उदास राहों में, इन बिखरते और सम्भालते हुए लम्हात में, ये मोहब्बत के जूनून का ही असर हो शायद, मेरी पल पल की दुआओं में, तूने जो मेरी मोहब्बत के लिये होंगे लिखे, मैंने आवाज़ दुआओं की उठा रक्खी है, |
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