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05.22.2009
 

मायाजाल
सीमा गुप्ता ’दानी’


हृदय के मानचित्र पर पल पल
तमन्नाओं के प्रतिबिम्ब उभरते रहे,
यथार्थ को दरकिनार कर
कुछ स्वप्नों ने साँसे भरी...
छलावों की हवाएँ बहती रहीं
बहकावे अपनी चाल चलते रहे,
क़ायदों को सुला, उल्लंघन ने
जाग्रत हो अँगडाई ली..
दृढ़निश्चयता का उपहास कर
संकल्प मायाजाल में उलझते रहे,
हृदय के मानचित्र पर पल पल
तमन्नाओं के प्रतिबिम्ब उभरते रहे...


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