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| 05.31.2008 |
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ख़त |
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आज लहू का कतरा कतरा दर्द बड़ा बेदर्द है, देख मेरे चाहत का नाम वफ़ा था जिसका वो कोई साथ नहीं हर मंज़र ख़ूने दिल से लिखा ये |
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