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मैं ताज .....
भारत की गरिमा
शानो शौक़त की मिसाल
शिल्प की अद्भुत कला
आकाश की ऊँचाइयों को
चूमती मेरी इमारतें,
शान्ति का प्रतीक ...
आज आँसुओं से सराबोर हूँ
मेरा सीना छलनी
जिस्म यहाँ वहाँ बिखरा पड़ा
आग की लपटों मे तड़पता हुआ,
आवाक मूक दर्शक बन
अपनी तबाही देख रहा हूँ
व्यथित हूँ व्याकुल हूँ आक्रोशित हूँ
मुझे कितने मासूम निर्दोष लोगों की
क़ब्रगाह बना दिया गया...
मेरी आग में झुलसती तड़पती,
रूहें उनका करुण रुदन,
क्या किसी को सुनाई नही पड़ता
क्या दोष था इन जीवित आत्माओं का ...
अगर नहीं, तो फ़िर दोषी कौन....
दोषी कौन, दोषी कौन, दोषी कौन ?????
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