अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
03.08.2009
 

बातें
सीमा गुप्ता ’दानी’


तुम से कहनी हज़ार हैं बातें,
लफ्ज़ कुछ, मगर बेशुमार हैं बातें...

तुम जिगर में उतरती जाती हो,
जो लिखी हमने अश्क़बार हैं बातें...

अब दूर तुमसे रहा भी नहीं जाता,
फिर वो ही पहलू-ए-यार हैं बातें...

राज़-ए-दिल लिए भटकते हैं तुम बिन,
क्या करें इस क़दर बेक़रार हैं बातें...


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें