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| 03.08.2009 |
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बातें |
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तुम से कहनी हज़ार हैं बातें, तुम जिगर में उतरती जाती हो, अब दूर तुमसे रहा भी नहीं जाता, राज़-ए-दिल लिए भटकते हैं तुम बिन, |
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