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ISSN 2292-9754

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03.14.2016


बातें

तुम से कहनी हज़ार हैं बातें,
लफ्ज़ कुछ, मगर बेशुमार हैं बातें...

तुम जिगर में उतरती जाती हो,
जो लिखी हमने अश्क़बार हैं बातें...

अब दूर तुमसे रहा भी नहीं जाता,
फिर वो ही पहलू-ए-यार हैं बातें...

राज़-ए-दिल लिए भटकते हैं तुम बिन,
क्या करें इस क़दर बेक़रार हैं बातें...


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