अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
03.14.2016


अय्याम ने

मैं यहाँ बेचैन हूँ तुम वहाँ बेताब हो,
किस जगह लाकर मिलाया है हमें अय्याम ने...

हों कई ऐसे भी जो रहते रहे हो इस तरह,
और रुबाई हो लिखी कोई उमर ख़य्याम ने...

रात भर जागा किए हैं तेरी यादों के तुफ़ैल,
कितने ख़्वाबों को बुना है इस दिले नाकाम ने...

तेरे आने की ख़बर हैं दिल में जागी है उमंग,
कितने दीपक ला जला डाले हैं मेरी शाम ने...

याद करने को नहीं आता है दिल दुःख के वह दिन,
और क्यों तुमको नहीं लिखा है मेरे नाम ने....


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें