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ISSN 2292-9754

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03.14.2016


आज फिर

आज फिर ये दो अखियाँ भर आई हैं
आज फिर तेरी याद चली आई है।

दिल ने कहा ताज़ा कर लें वो सारे ग़म,
आज फिर हमने ज़ख़्मों की किताब उठाई है
लबों ने चाहा कर लें ख़ामोशी से बातें हम,
आज फिर हमने तबीयत बहलाई है।

नज़र मचल गई है एक दीदार को तेरे,
आज फिर तेरी तस्वीर नज़र आई है।
रहा नहीं वायदों और वफ़ाओं का वजूद कोई,
आज फिर हर एक चोट उभर आई है।

आज फिर हमने चाहा करें टूट कर प्यार तुम्हें,
आज फिर दिल में वही आग सुलग आई है।
आज फिर ये दो अखियाँ भर आई हैं
आज फिर तेरी याद चली आई है।


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