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| 05.31.2008 |
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आज फिर |
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आज फिर ये दो अखियाँ भर आई हैं दिल ने कहा ताज़ा कर लें वो सारे ग़म, नज़र मचल गई है एक दीदार को तेरे, आज फिर हमने चाहा करें टूट कर प्यार तुम्हें, |
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