सीमा गुप्ता ’दानी’


कविता

अय्याम ने
आज
आज फिर
काफ़ी है
ख़त
चले आओ
तन्हाई
तुम्हें पा रहा हूँ
तुम चाहो तो
दोषी कौन
मधुर एहसास
मायाजाल
मुलाक़ा
मैं
बातें
याद किया तुमने या नहीं
वो
हवा

दीवान

काफ़ी है
ज़िंदगी भर यही सोचता..
नयी
मेरी उम्मीदों को नाकाम ...