अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
10.16.2014


क्या जानों सरकार हमारे बारे में

कितने शिष्टाचार, हमारे बारे में!
क्या समझे हो यार हमारे बारे में!

जब से देखा, तुमसे दूरी रखते हैं!
दिल न दुखे सरकार, हमारे बारे में!

हमको रोज़ परिंदे ही बतला जाते
कितने हाहाकार, हमारे बारे में!

जो वे चाहें करें फैसला, किस्मत का
है उनका अधिकार, हमारे बारे में!

मरते दम तक तुम्हें नहीं समझायेंगे
कितने गलत विचार हमारे बारे में!


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें