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ISSN 2292-9754

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09.30.2014


जब देखेंगे खाली कुर्सी, पापा याद बड़े आयेंगे!

चले गए वे अपने घर से
पर मन से वे दूर नहीं हैं!
चले गए है इस जीवन से
लेकिन लगते दूर नहीं हैं!
उन्हें याद करने पर बेटा, कंधे हाथ रखे पाएँगे!
अपने आसपास रहने का, वे आभास दिए जायेंगे!

अब न मिलेगी पप्पी उनकी
पर स्पर्श तो बाकी होगा!
अब न मिलेगी उनकी आहट
पर अहसास तो बाकी होगा
कितने ताकतवर लगते थे, वे कठिनाई के मौकों पर!
जब जब याद करेंगे दिल से, हँसते हुए, खड़े पाएँगे!
अपने कष्ट नही कह पाये
जब जब वे बीमार पड़े थे
हाथ नहीं फैलाया आगे
स्वाभिमान के धनी बड़े थे
पाई पाई बचा के कैसे, घर की दीवारें बनवाई!
जब देखेंगे खाली कुर्सी, पापा याद बड़े आयेंगे!

अब तो उनके बचे काम को
श्रद्धा से पूरे कर लेना!
उनके दायित्वों को ही बस
मान सहित पूरे कर लेना!
चले गए वे बिना बताये पर उनका आभास रहेगा!
दुःख में हमें सहारा देने, पापा पास खड़े पाएँगे!

तिनका तिनका जोड़ उन्होंने
इस घर का निर्माण किया था!
बड़ी शान से, हम बच्चों को
पढ़ा लिखा कर, बड़ा किया था!
उनकी बगिया को महकाकर, यादें खुशबूदार रखेंगे!
हमें पता है हर सुख दुःख में, सपने में जरूर आयेंगे!


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