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ISSN 2292-9754

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09.30.2014


हम विदा हो जायेंगे तो :

एक तड़प सी उठती रही
अक्सर हमारी साँस से,
जब तक रहेंगे हम यहाँ
कुछ काम होंगे, शान से!
गीत कुछ, ऐसे रचें जाएँ, जो सब के मन बसें!
हम विदा हो जाएँ तो, पदचिन्ह रहने चाहिए!

बात तो तब है कि वे
जगते रहे हों रात से!
और दरवाजे सजे हों
प्यार, बंदनवार से!
आहटें पैरों की सुनकर, साज़ भी थम जाएँ जब,
देखकर हमको वहां, कुछ ढोल बजने चाहिए!

हम जहाँ से गुजर जाएँ,
महक जाएँ बस्तियाँ,
हम जहां ठहरें, वहां
आबाद होगीं वादियाँ
मेरे जगने पर सुनें, सब चहकना संसार का,
और जाने पर मेरे, आँसू छलकने चाहिए!

बात होगी खास, जब
मरने पर मेरे, दोस्तों
रंजिशों को आके खुद
आँसू बहाना चाहिए!
अंत से पहले प्रभू से, शक्ति इतनी चाहिए!
द्वार से याचक, न खाली हाथ, जाने चाहिए!

गीत चाहें हों, अधूरे,
गंध कस्तूरी की हो!
आधी गागर, गीत की,
पर रागिनी भरपूरहो!
धीरे धीरे गीत मेरे, होठों पर आ जायेंगे!
हम रहें या ना रहें, ये गीत रहने चाहिए!


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