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ISSN 2292-9754

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10.16.2014


एक शब्द चित्र माँ के लिए

माँ, तुझे बापस, बुलाना चाहता हूँ!
इक असंभव गीत, गाना चाहता हूँ!

इक झलक तेरी, मुझे मिल जाये तो,
एक कौर ही, खिलाना चाहता हूँ!

मुझसे हो नाराज़, मत मिलना मुझे,
अपने बच्चों से, मिलाना चाहता हूँ!

जानता हो अब न तुम आ पाओगी
सिर्फ सपने में, बुलाना चाहता हूँ!

जाने कितनी बार ये, रुक-रुक बहे!
माँ, मैं आँसू को, जिताना चाहता हूँ!

देख तो लो माँ, कि बेटा है कहाँ?
तेरा घर तुझको दिखाना चाहता हूँ!

बहुत दिन से चल रहे हैं, बिन रुके!
आज दिनकर को बिठाना चाहता हूँ!


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