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ISSN 2292-9754

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06.17.2016


अजनबी सी रात आयी

अजनबी सी रात आयी।

न जाने किसे -
अपना बनाने आयी?

एक-एक क्षण नया
पंख फैलाती आयी।
हर सभी को
अपना बनाती आयी।

चाँद तारे रात काली साथ-
हल्की-हल्की हवा लायी
थके-थके से मन को
आनंदित करने आयी।

आप-धापी से ऊब चुके हैं,
अपने को भूल चुके हैं,
बिछड़ों को मिलाने आयी
अजनबी सी रात आयी,
सभी को अपना बनाने आयी।


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