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ISSN 2292-9754

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05.28.2014


नाइटिंगेल - माई लव

लक्ष्मी के जाने के बाद अनुमेहा ने चैन की साँस ली। चलो अब आराम से चैट करूँगी। कब से इन्तज़ार कर रही थी। आज कुछ ज़्यादा ही देर बर्तन चमकाती रही, सफाई के बीच-बीच में ही अपने पति से झगड़े की बात बताती रही। अब गई है। थैंक गॉड! इसी घड़ी का तो इन्तज़ार करती है वह, जब घर में कोई न हो। बेटी रिया भी दो बजे तक स्कूल से आ जाएगी। उसके आने से पहले वह पिछले दिन का ब्यौरा उसे दे देना चाहती है। कितना कुछ है कहने के लिए। पर उसकी कोई मीटिंग हुई तो? कैसे करेगी दिल हल्का? देखती हूँ दिन भर तो ऑनलाइन रहता ही है। अनु ये सब सोचते हुए फुर्ती से पी.सी. पर बैठ गई। इतनी फुर्ती तो शरीर में तब भी नहीं होती जब रिया को सुबह स्कूल भेजती है, अमित का नाश्ता और लंच तैयार करती है, किचन के पचासों काम निपटाती है। ऑनलाइन होते ही उसे निराशा हुई, आज मोहित कहाँ है। बारह बज गए। इस समय तो हमेशा ही ऑनलाइन रहता है। वह बुझ-सी गई। सारा उत्साह ठंडा पड़ गया। पाँच, दस, पन्द्रह मिनट, आधा घंटा वह बैठी रही फिर निढाल होकर बैड पर लेट गई। यह भी भूल गई कि आज वह नहाई नहीं है।

मोहित के बारे में सोचते हुए उसे वही सिहरन महसूस होती है, जो दस साल पहले प्रेमी अमित के साथ रहते हुए महसूस होती थी। अमित और अनुमेहा का प्रेम विवाह था। दो साल तक दोनों एक साथ देखे जाते थे। कॉलेज, मार्किट, मॉल, सिनेमा हॉल हर जगह। और इस जोड़ी ने अंततः अपने आपको हमेशा के लिए एक कर सामाजिक मान्यता ले ली थी। विवाह के आरंभिक दो-तीन साल एक दूसरे के साथ कब बीते, पता ही नहीं चला। बहुत ही मादक, सुखद समय फुर्र से उड़ गया और अनु की गोद में रिया को डाल गया। रिया के आने के बाद प्रेम की डोर और कस गई। अमित के व्यक्तित्व में पिता का अंतरण देखकर उसने ख़ुद को दुनिया की सबसे भाग्यशाली स्त्री माना था। माँ, पत्नी का दायित्व वह बख़ूबी निभा रही थी। और एक दिन चैट रूम में जाते ही उसके पास उछलता हुआ वह मैसेज आया था - ‘हैलो! नाइस आई डी - नाइंटिंगेल।’ उस मैसेज ने उसका ध्यान आकर्षित किया था। आज तक किसी ने भी उसे उसके आई डी पर ऐसी प्रतिक्रिया नहीं दी थी। उसकी उँगलियाँ माउस से इग्नोर का बटन नहीं दबा पाई थीं। और उसने भी रिप्लाई करना शुरू कर दिया था। उस दिन बहुत देर उससे चैट होती रही। और गुड नाइट के बाद अनुमेहा की फ्रैंड्स लिस्ट में एक अनदेखा, अनजाना और शायद प्यारा सा दोस्त शामिल हो चुका था।

उस पहली चैट में ही उसने अपनी सारी डिटेल अनु को खुलकर दे दी थी। नाम - मोहित मदान, काम - सॉफ्टवेयर इंजीनियर, उम्र - 38 साल, सभी कुछ। उसने तो कितनी ही डिटेल उससे छिपाई, पर वो तो बड़ा ओपन रहा। अनु ने अमित को अपने इस फ्रैंड के बारे में बताया भी तो उसने यही कहा, चलो तुम्हारी लिस्ट में एक और तो जुड़ा। अब उससे अपनी कहानियाँ कहना। मुझे तो सुना-सुनाकर बोर ही करती हो। दिन बीतते रहे और अनु और मोहित की चैट के घंटे बढ़ते रहे। रिया के सोने के बाद कभी-कभी वह सारी दोपहर चैट करती। बातें बढ़ती रहीं। घर-परिवार से लेकर रुचियाँ, दुनिया जहां की बातें और सब कुछ। कब ये बातें प्यार की बातें बन गईं, उसे पता ही नहीं चला। प्यार, मनुहार जैसे वह मोहित न होकर अमित हो। वह ख़ुद को टटोलती भी, डाँटती भी, लताड़ती भी कि तेरा पति है, एक बच्ची है, ये कैसी बातें तू उसके साथ कर रही है। पर ये सब बातें उसे ज़्यादा देर परेशान नहीं कर पाती थीं। और सब भूलकर वह मोहित की चैट में ही खोई रहती। एक संसार उसका अमित और रिया के साथ था और एक दुनिया उसकी मोहित के साथ थी, जिसमें वह ख़ुद को उसकी प्रेमिका मान चुकी थी। और मोहित भी उसे कई बार ‘माई लव’ कहता था। पर ये प्रेम ज़्यादा समय ऑनलाइन न रह सका। कुछ महीने बाद ही दोनों मिले थे और इस पन्द्रह मिनट की मुलाकात ने ही दोनों को चैटिंग में और अधिक खोल दिया था। अमित जैसा हैन्डसम वो नहीं था पर कुछ था मोहित के चेहरे में जो उसे अपनी ओर खींच रहा था।

 

रिया स्कूल से आ गई थी। उससे बात न हो पाने की खीज वह दबा चुकी थी और अपने संसार में वापिस आ चुकी थी। दूसरी क्लास में है उसकी रिया। बिल्कुल अमित की प्रतिछवि - प्यारी सी। रिया के घर आने पर अमित घर पर फ़ोन करता है। कितना ज़िम्मेदार है अपने परिवार के लिए। पर इतना खुशियों भरा संसार होने के बाद भी उसका मन मोहित से नहीं हटता। क्यों उससे मिलने की बेचैनी बढ़ती रहती है उसकी। वह शादीशुदा है - जानती है वह। तो क्या हुआ, उनके बीच दोस्ती है - सिर्फ़ दोस्ती। पर दोस्ती होती तो उसे इतने बेचैनी दिन के बारह बजने की नहीं होती जब वह ऑनलाइन रहता है। एक मायाजाल है उसके आसपास मोहित का, जिसे वह तोड़ना नहीं चाहती। कोशिश करे तो बच सकती है पर नहीं। इसी ख़ुमारी में वह अपने दिनों को बहा ले जाना चाहती है।

 

रात नींद नहीं आई। अमित ने रात की तन्हाइयों में उसे आगोश में भरना चाहा पर वह डरी हुई हिरनी की तरह उससे बिदक गई।
"आज थक गई हो ज़्यादा। लगता है रिया ने बहुत तंग किया है।"
"हाँ। दिन भर सिर दर्द करता रहा।"
" तो एक डिस्प्रिन ले लो। ठीक हो जाएगा।"
उसने टालना चाहा। अमित ने अनु को अपने करीब सटा लिया। अनु थी तो अमित के साथ पर मोहित के ख़्यालों में। उसकी हँसी उसके कानों में गूँज रही थी।

 

दो बजे रिया आई तो उसने लपककर उसे गोद में ले लिया। रिया ने भी माँ को इतना ख़ुश कभी नहीं देखा था। कल तो बड़ी उदास थी। आज मोहित से दो घंटे चैट हुई। इतनी चैटिंग पिछले आठ महीने में भी शायद नहीं हुई होगी पर कुछ पंक्तियाँ आज उसके दिमाग में छपी हुई हैं -

"तुम्हारे और भी नैट फ्रैंड होंगे?"

"हैं तो"

"चैट रूम में तुम रोज़ ही जाती होगी"

"जबसे तुम मिले हो, नहीं जाती और न अब जाऊँगी...."

 

अमित के ऑफिस में तीन दिन की छुट्टी है। तीनों जयपुर आए हैं। रिया बहुत ख़ुश है और अमित व अनु उससे भी ज़्यादा ख़ुश। हवा महल, जल महल की सुंदरता में वह खोकर रह गई। और आमेर का किला कितना भव्य है! रानियों का एक कोने से दूसरे कोने तक जाने में ही पूरा दिन निकल जाता होगा। एक-एक कक्ष को देखकर वह आश्चर्यचकित थी। दिन के बारह बज चुके थे पर आज उसे कैसे बताए। उसे पता भी नहीं होगा कि वह जयपुर आई है। ऑफलाइन मैसेज छोड़ सकती थी। उसका मन किया कि काश इस किले में कहीं से मोहित नज़र आ जाए। इस ख़ूबसूरत ख़्याल से ही उसका चेहरा खिल उठा। अमित ने पूछा अकेले ही मुस्कुरा रही हो। वह इतना ही बोली "किला है ही इतना ख़ूबसूरत"।

 

लक्ष्मी बर्तन माँज रही थी। उसके हाथ से कप टूटकर गिरा था। लक्ष्मी हैरान थी कि आज मेमसाहब कप टूटने की आवाज़ से भी नहीं चिल्लाईं। अनु लिविंग रूम में टी.वी. चलाकर बैठी थी पर उसे न टी.वी. पर चल रहे सीरियल की आवाज़ ही सुनाई दे रही थी और न ही कप टूटने की आवाज़ ही सुनाई दी। वह अपने शरीर को समेटकर बैठी थी जैसे कोई उसे उससे छीन रहा हो। उसकी आँखों में एक-एक चित्र उभर रहा था - अपने और मोहित के मिलन का। मोहित के हाथ लगाते ही एक करंट सा उसके जिस्म को छू गया था और पल भर में सब बिखर गया था। काश! उस पल में ख़ुद को सँभाल लेती तो आज ग्लानि की चिता पर इस तरह न बैठी होती। पर क्या वो उस समय ख़ुद सँभाल पाती। शायद नहीं। परपुरुष के प्रति इतना आकर्षण उसे नैतिकता से दायरे से बाहर खींच लाया था।

 

बारह बज चुके थे। अनु नहीं चाहती थी कि ऑनलाइन हो पर न जाने क्यों बैठ ही गई। मोहित को ऑनलाइन देख वो ख़ुशी आज नहीं हुई। मोहित का ही उछलता हुआ मैसेज आया था - "माई लव! हाउ आर यू?" पर उसने कोई जवाब नहीं दिया। थोड़ी देर बाद "व्हाट हैपन्ड" के जवाब में वह सिर्फ इतना ही टाइप कर पाई "नथिंग"। बहुत देर ख़ामोशी। फिर ऑफलाइन हो गई। रिया की आँखों की मासूमियत उसे ख़ुद को लताड़ती हुई लगी। आठ महीनों से चला आ रहा तूफान जैसे थम सा गया था और अपने पीछे गहन नीरवता छोड़ गया था। अनु का अचानक खिलखिलाना, हर काम में उसका जोश के साथ लगना, अमित को झूठा रोष दिखाना, इन सबकी जगह पर अनु बहुत शांत, स्थिर, सहज हो आई थी। एकांत में जब अमित के साथ होती तो प्यार के देवता के समक्ष एक अपराधिनी की तरह मूक पशु के समान समर्पित हो जाती। सब कुछ सामान्य था। पृथ्वी अपनी धुरी पर उसी गति से घूम रही थी। सूर्य, चंद्रमा, तारे, पेड़-पौधे, फूल-पत्ती सब वही थे। पर अनु को अपने जीवन में गहरी काली छाया ही दिखाई देती। इस काली छाया को वह साबुन से रगड़-रगड़ कर साफ करना चाहती थी पर छाया और गहरी होती जाती थी। मोबाइल पर आने वाली मोहित की मिस कॉल का वह जवाब नहीं देना चाहती थी। नेट पर बैठना उसने लगभग छोड़ ही दिया था। कामवाली के जाने के बाद वह अपने आपको व्यर्थ के कामों में उलझाकर रखती। रिया स्कूल से आ जाती तो उसे खाना खिलाकर सुला देती और ख़ुद भी सोने की व्यर्थ-सी कोशिश करती पर नींद उससे कोसों दूर रहती।

 

आज कई दिनों बाद अनु ऑनलाइन थी। मोहित के कई ऑफलाइन मैसेज थे। उसके प्यार के, उसके बारे में चिंता के, कुछ प्रेम की पंक्तियाँ थीं पर वह ख़ुद नहीं था। मैसेज एक हफ्ते पुराने थे। उसकी मिस कॉल भी एक हफ्ते से नहीं आई। कहाँ गया वह? खैर उसे क्या। पर ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। उसकी बेरुख़ी देखकर ही शायद उसने मिस कॉल करनी छोड़ दी। भावनाओं के भंवर में डूबते-उतरते उसने उसे फ़ोन किया पर स्विच ऑफ़ आ रहा था। दूसरे दिन भी वह ऑनलाइन नहीं था। कहाँ गया मोहित? अचानक उसके दो हफ्तों का पश्चाताप, ग्लानि सब बह गया। उसकी जगह पर वही पुरानी बेचैनी बढ़ आई थी। बल्कि उससे भी कहीं अधिक। वह ठीक तो है? तरह-तरह के सवाल, आशंकाएँ उसके मन में उठने लगे। लक्ष्मी के काम करते-करते ही वह ऑनलाइन हो जाती। कभी-कभी तो रिया के आने के बाद भी ऑनलाइन रहती। उसके सारे काम निपटाती। बीच-बीच में देखती रहती कहीं आ तो नहीं गया। पर हर बार उसे निराशा होती। अपने ऊपर उसे गुस्सा आने लगा था। वही ज़िम्मेदार है। वह न कहती तो क्या कभी मोहित उसके इतने करीब आता? फिर क्यों उसके बाद इतनी निष्ठुर हो आई उसके लिए? मोहित ने तो बात करनी चाही थी पर उसी ने कोई रिप्लाई नहीं दिया। काश एक बार उससे बात हो जाए। माफी माँग लेगी अपने बर्ताव के लिए और उस दिन जब मोहित ऑनलाइन हुआ तो वह लगभग रो ही पड़ी थी। उँगलियाँ बेकाबू होकर की-बोर्ड पर नाच रही थीं। उधर से मैसेज बाद में आता था, इधर उसकी उँगलियाँ पहले ही उसका जवाब टाइप कर देती थीं। शायद एक संवाद ऑनलाइन था और एक संवाद टेलीपैथी के द्वारा हो रहा था -

नाइंटिंगेल - "आइ गॉट सो डिप्रेस्ड, वेयर वर यू"

मोहित - "आइ वाज़ नॉट इन टाउन"

नाइटिंगेल - "फ़ोन तो कर सकते थे"

मोहित - "सॉरी माई लव, आई वाज़ बिज़ी, इट वॉज़ ऐन ऑफिशियल ट्रिप"

नाइटिंगेल - "योर ट्रिप मेड मी क्रेज़ी............................................................................"


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