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04.14.2014


सिक्स्थ सेन्स

स्पर्श -
अहसासों से भरा वह शब्द
जो रिश्तों की ऊँगली पकड़
खुद अपनी पहचान बनाता है .....
- हर रिश्ते का अपना अनुभव -
जहाँ पिता का आश्वस्त करता स्पर्श -
अपूर्व विश्वास भर जाता है-
वहीँ भ्राता का रक्षा भरा स्पर्श ,
भयमुक्त कर जाता है -
पति या प्रेमी का सिहरन भरा स्पर्श -
असंख्य सितारों की मादकता भर जाता है -
तो वहीँ भीड़ की आड़ लेते लिजलिजे अजनबिओं का घिनौना,
और अनचाहे रिश्तेदारों का मौका परस्त स्पर्श -
शरीर पर लाखों छिपकलिओं की रेंगन भर जाता है -
- सभी स्पर्श !
लेकिन कितने भिन्न !!!
और इनकी सही पहचान -
ही हमारा सुरक्षा कवच है ...
हमारी "सिक्स्थ सेन्स" !!!!!!!


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