अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
01.28.2015


नहीं सीने में दिल मेरा

नहीं सीने में दिल मेरा यह किसकी शरारत है
काम नहीं किसी और का, ख़ुद दिल की ख़िलाफ़त है

कह रहे हैं हमसे वो दिल के बदले ले लो दिल
मोहब्बत अब तो लोगो, हुई जैसे तिजारत है

सात परतों के भीतर से भी कर ले गया पार कोई
या अल्लाह, तेरी क़ायनात की, ये कैसी हिफ़ाज़त है

गर तू है ख़ुदा नाम का तो हम भी हैं बन्दे तेरे
दिखावे का ही सजदा अपना, दिखावे की ही इबादत है

संभाल के रखना दिल अमानत है यह "सपना" की
किया जो इधर उधर, तो समझो बग़ावत है


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें