सन्तोष कुमार प्रसाद

कविता
अवधूत सा पलाश
अस्तित्व
अहसास
क्या देखा है तुमने
घुटन
पहली बरसात
पार्क की वह बेंच
मँझधार
माँ आज मैंने तुम्हें याद किया
मैं ख़्वाब सहलाता रहा
दिल ढूँढता है
ये कौन सी उमस है