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05.31.2008
 

समय छीनता है
संजीव कुमार बब्बर


समय छीनता है
माँ की लोरियॉ
पिता की गोद
विद्यालय के दोस्त
प्यारा बचपन
अलहड़ जवानी
माँ बाप
भाई बहन
और...

देता है
सफेद केश
झुकी कमर
चार कंधे
कुछ लकड़ियाँ
और...
आग


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