प्रेम मोहताज नहीं संजीव कुमार बब्बर
प्रेम मोहताज नहीं रंग का रूप का आँखों का दिमाग़ का भाषा का आवाज़ का नाम का धर्म का संस्कार का... मोहताज है प्रेम हाँ सिर्फ़ प्रेम का