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09.06.2008
 

प्रेम मोहताज नहीं
संजीव कुमार बब्बर


प्रेम मोहताज नहीं
रंग का
रूप का
आँखों का
दिमाग़ का
भाषा का
आवाज़ का
नाम का
धर्म का
संस्कार का...
मोहताज है प्रेम
हाँ सिर्फ़
प्रेम का


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