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05.31.2008
 

दर्द का पैमाना
संजीव कुमार बब्बर


दर्द का अहसास
सबका अलग होता है
कोई काँटे पे
कोई फूल से
कोई धोखे पे
कोई प्रेम में
कोई खोने पे
कोई पाने पे
इसका अहसास पाता है
और ...
खोई मौत पर भी
इसे समझ नहीं पाता है


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