संजीव कुमार बब्बर

कविता
अपाहिज
आँसू बोलते हैं
क्यों फैला है भ्रष्टाचार
दर्द का पैमाना
दस्तावेज़ कीमती है
प्यास
प्रेम मोहताज नहीं
मुस्कुराना ज़रूरी है
समय
समय छीनता है
हर पल
बाल-साहित्य
मैं और मेरा मित्र