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| 08.11.2007 |
| यहाँ पीपल की छाँव है संजीव बक्षी |
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यह रास्ता मंजिल चाहे जो हो आप यहीं करिए इंतज़ार रास्ते के ऊपर हाँफ रहा है यह मंजिल पर भी ठहरेगा मंजिल पेड़ पर फली है पेड़ नहीं जाता कहीं चल कर मौसम आएगा इसी रास्ते ठहरिए यहीं करिए इंतिजार |
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