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08.11.2007
 
मुझे जंगली कहो
संजीव बक्षी

यहाँ के पक्षी पहाड़ी हैं

यहाँ के गीत
पहाड़ी हैं

यहाँ के लोग
पहाड़ी हैं

जाहिर है यहाँ सब ओर पहाड़ है
पहाड़ ही पहाड़

सब कुछ पहाड़ी है

मुझे जंगली कहो
मन को अच्छा लगेगा
मेरे आसपास के लोगों को कहो
’जंगली‘
ठिठको मत
मेरी कविताओं को
मेरी बातों को जंगली कहो

आँखें बंद कर लो
अब कहो ।


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