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| 09.06.2008 |
| हिन्दी महिमा -२ आचार्य संदीप कुमार त्यागी "दीप" |
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भारतमाता के भव्यभाल की है बिन्दी हिंदी
पहिचान आन बान शान स्वाभिमान है। न्यारी प्राणप्यारी प्रजा सारी बलिहारी भव्य- भाषा है हमारी दिव्य-देश हिंदुस्तान है॥ चमाचम चमकेगी चारु चंद्रिका सी शुचि रुचिरा गंभीरा गिरा गरिमा महान है। देवभाषा सुता भद्रभाव भूषिता है हिन्दी होनी विश्वभाषा अरे दीप का ऐलान है॥२॥ |
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