आचार्य संदीप कुमार त्यागी "दीप"


कविता

अनुपमा
अभिनन्दन
उद्‌बोधन:आध्यात्मिक
कलयुग की मार
कहाँ भारतीयपन
कुछ मंदिरों के अंदर
कुत्ता! बापू की समाधि जा चढ़ा
जवाँ भिखारिन-सी
जाग मनवा जाग
जीवन में प्रेम संजीवन है
तेरी मर्जी
तुम्हारे प्यार से
प्रणय गीत
प्रेम की व्युत्पत्ति
प्रेम धुर से जुड़ा जीवन धरम
मधुरिम मधुरिम हो लें
माँ! शारदे तुमको नमन
फुँफकारती कुण्डलियाँ
राम का नाम ले
राष्ट्रभाषा गान
संन्यासिनी-सी साँझ
सच्ची बात लगे बुरी
सदियों तक पूजे जाते हैं
हसीं मौसम
हिन्दी महिमा -१
हिन्दी महिमा -२