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| 07.13.2008 |
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पुलिसिया हेलीकाप्टर |
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कल दफ्तर
से घर की तरफ चला तो हाईवे पर एकाएक मेरी कार के ऊपर ऊपर हेलीकाप्टर उड़ता
नजर आने लगा। पुलिस वालों का था। आकस्मिक सहायता एवं कानून व्यवस्था बनाये
रखने रखने के लिए अक्सर ही हाईवे पर उड़ता रहता है।
मैं भी
अपने बचपन की आदत का गुलाम। कुछ आदतें बचपन की ऐसी होती हैं,
जो
आपके स्वभाव का हिस्सा बन जाती हैं। चाहे जितनी कोशिश करो,
छूटती ही नहीं। उन्हीं में से मेरी एक आदत है कि जब भी हवाई जहाज या
हेलीकाप्टर की आवाज सुनाई देती है मैं बरबस ही आकाश में ताकने लगता हूँ और
उसे उड़ता हुआ देखकर खुश होता हूँ। अब तो अक्सर बच्चे (बड़े हो गये हैं न!)
और पत्नी कहते हैं कि ये क्या आदत है। कितनी शर्मिंदगी होती है सब के बीच
में.. इसे बदलो।
हमने
बताया भी कि यह तो तुम लोग ’इम्प्रूव्ड वर्ज’
देख रहे हो हमारी आदत का वरना तो तुम लोग मुँह दिखाने के काबिल न रहते।
पहले तो हर हवाई जहाज को देखकर हम टाटा भी किया करते थे। अब कम से कम टाटा
नहीं करते,
इतना ही गनीमत समझो। इससे ज्यादा हम नहीं बदल सकते। वो भी चुप हो जाते हैं
कि कहीं ज्यादा बोला और ये पुरानी आदत पर वापस चले गये,
तब
तो गज़ब ही हो जायेगा।
बस,
हेलीकाप्टर का ज़िक्र आया और वो भी पुलिस वालों का तो आदतानुसार भारत का
विचार हमेशा की तरह दिमाग में कौंधा कि अगर वहाँ हर शहर की पुलिस को एक एक
हेलीकाप्टर दे दिया जाये तो क्या सीन बनेगा। दिया तो आकस्मिक सहायता के
लिये ही जायेगा और जब आप एमरजेन्सी में फोन करेंगे तो देखिये कैसे कैसे
जबाब आ सकते हैं:
-
हाँ सर,
हेलीकाप्टर तैयार है। आप आ जाईये। यहाँ पर मुनीम से फार्म लेकर भर कर जमा
कर दिजिये। हम उसे साहब की स्वीकृति के लिए भेज देंगे। स्वीकृति मिलते ही
हेलीकाप्टर रवाना हो जायेगा।
अब आप
थाने पहुँचे तो पता लगा कि फार्म भर के साथ में दो फोटो,
एक
फोटो आई डी,
एड्रेस प्रूफ और नोटराइज्ड शपथ पत्र कि यह हेलीकाप्टर मात्र आक्समिक
दुर्घटना से निपटने के माँगा जा रहा है तथा इसका किसी भी प्रकार से
व्यक्तिगत उपयोग नहीं होगा आदि लगाना होगा। आयकर का पेन नम्बर देना
अनिवार्य है एवं एक मात्र पाँच हजार रुपये का ड्राफ्ट सिक्यूरिटी डिपाजिट।
फार्म इन
सारे कागजों के साथ जमा करने के बाद इसकी फाईल बनाई जायेगी तथा एक
इन्सपेक्टर दुर्घटना स्थल पर जाकर अपनी रिपोर्ट बनायेगा कि दुर्घटना में
वाकई एमर्जेन्सी है तथा उससे बिना हेलीकाप्टर के मदद के नहीं निपटा जा सकता
वरना देर हो सकती है। संभव हुआ तो दुर्घटना की तस्वीरें भी साथ लगाई
जायेंगी और फिर इन्सपेक्टर के अनुमोदन के साथ फाईल साहब के समक्ष प्रस्तुत
की जायेगी। उनका निर्णय ही अन्तिम और मान्य होगा।
जब तक
सारे कागज तैयार होकर तीन चार दिन में साहब के समक्ष प्रस्तुत करने का समय
आया,
साहब हफ्ते भर की छुट्टी पर गाँव चले गये।
मगर
एमर्जेन्सी को यूँ ही अनदेखा नहीं किया जायेगा। साहब के वापस आते ही सातों
पेन्डिंग हेलीकाप्टर केस पहले निपटाये जायेंगे फिर अन्य कोई कार्य सबजेक्ट
टू अगर मंत्री जी का दौरा न हो तो।
आखिर
पुलिस आपकी मित्र है और आपकी साहयता के लिए है। वो नहीं ख्याल करेगी तो कौन
करेगा।
और भी कई
सीन ख्याल आ रहे हैं कि ऐसा भी जबाब मिल सकता है। उनको विस्तार न देते हुए
सिर्फ बिन्दुवार देता हूँ। विस्तार करने में तो आप सब सक्षम हैं ही। खैर
आपकी सक्षमताओं को तो क्या कहना,
आप
तो बिना बिन्दु के भी विस्तार दे जायें (एक सच्चे भारतीय होने का प्रमाण):
---आपको
और कुछ सूझता हो,
तो
जोड़िये।
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