मेरे गीत, उन पाँवों के छालों के मरहम बनें । जिन्होंने नवचरणों को राह दी ।।
मेरे दीप, उन गाँवों में सूरज बन जले । जिन्होंने जीवन को वासंती चाह दी ।।
मेरी तरुणाई, उन बूढ़े वृक्षों को मिले । जिन्होनें हमें मीठे फल दिये ।।
मेरी उमर, उन महाचरणों को मिले । जिन्होने हमें स्वतंत्र पल दिये ।।