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12.24.2007
 
नया सबेरा
सजीवन मयंक

नये वर्ष का नया सबेरा ।
जितना मेरा उतना तेरा।।

समय चक्र पूरा कर लेता ।
नियत समय पर अपना फेरा ।।

आता जाता है जीवन में ।
कभी उजाला कभी अंधेरा ।।

कोई भी पल नहीं रुका है ।
हमने तो चाहा बहुतेरा ।।

चुपके चुपके ले जायेगा ।
हर बीता पल, समय मछेरा ।।

हम ही नहीं समझ पाते हैं ।
समय रहा है छिपा लुटेरा ।।

आसमान में नये वर्ष में ।
उसने सूरज नया उकेरा ।।
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