सजीवन मयंक


दीवान

आज कोई तो फैसला होगा
आने वाला कल देखो
ईमानदारी से चला ...
उसी को कुछ कहते ...
एक भी खिड़की नहीं
कहने लगे बच्चे कि ...
जब कभी मैं अपने अंदर ...
जैसा सोचा था जीवन ...
दुनियाँ में ईमान धरम ....
दूर बस्ती से जितना घर होगा
नया सबेरा
नये पत्ते डाल पर आने लगे
बात कुछ की कुछ
मछेरा ले के जाल आया है
रोशनी देने इस ज़माने को
शब्द को कुछ इस तरह
शून्य से शिखर हो गए
समर्पण
हम ने जितना खोया
हर चेहरे पर डर दिखता है
हर दम मेरे पास रहा है