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| परिचय | |||||
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| नाम : | सजीवन मयंक | ||||
| जन्म : | 21-10-1943 | ||||
| शिक्षा : | एम. एस सी.(रसायन) हिन्दी संस्कृत विशारद । | ||||
| संप्रति : |
शा.उत्कृष्ठ उ.मा.शाला बाबई होशंगाबाद से 31-10-2005 कोप्राचार्य के
पद से सेवानिवृत्त। वर्तमान में साहित्य सृजन एवं सामाजिक कार्य में संलग्न । |
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प्रकाशन एवं लेखनः |
साठ के दशक से लेखन प्रारंभ। धर्मयुग, सारिका, साप्ताहिक हिन्दुस्तान,
कादम्बिनी, भारती, मधुमति, रंग-चकल्लस, इंगित, सरिता, मुक्ता, योजना,
आरोग्य संदेश, एवं समाचार पत्रों में रचनाएँ प्रकाशित, आकाशवाणी इंदौर
भोपाल से नियमित काव्यपाठ। संकलन: गाते चलें पढ़ाते चलें। उजाले की कसम, माटी चंदन है, फागुन आनें वाला है प्रकाशनाधीन । |
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| सम्मानः | वर्ष 1962 में अखिल रंग भारतीय काव्य प्रतियोगिता में पुरस्कृत | ||||
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