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03.22.2008
 
वर्ष १९५५ से नियमित प्रकाशित साहित्य और संस्कृति की
एक बेहतरीन पत्रिका हिमप्रस्थ

एस. आर. हरनोट

 

सारिका, धर्मयुग, नई कहानी, साप्ताहिक हिन्दुस्तान सहित दैनिक समाचार पत्रों के जब साहित्य और संस्कृति के मेगजीन सैक्शन बन्द होने शुरू हुए तो लेखकों और पाठकों के समक्ष एक बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया था कि अब इस तरह की कोई अच्छी साहित्य की न तो पत्रिका निकल पाएगी और न ही समाचार पत्रों के अब साहित्यिक विशेषांक इत्यादि देखने को मिल सकेंगे। लेकिन यह सोच उस समय गलत सिद्ध हो गई जब हिन्दी साहित्य की कई नई पत्रिकाओं ने देश के विभिन्न भागों से दस्तक दीं। इनमें कथादेश, कथन, साहित्य अमृत, उद्‌भावना, तद्‌भव, वसुधा, अकार, अपेक्षा, कथाक्रम, बया इत्यादि कई और पत्रिकाएँ प्रमुख रूप से सामने आईं और निरन्तर प्रकाशित हो रही हैं। लेकिन दैनिक समाचार पत्र जिस तरह से पहले साहित्य के लिए उदारवादी थे उन्होंने एक संकुचित दृष्टिकोण अपनाया और उन पृष्ठों पर ज्योतिष, फिल्म और न जाने क्या ऊज-जलूल संस्करण निकलने लगे। आज कुछ समाचार पत्र नाक-भौं सिकोड़ कर अवश्य साहित्यकर्म सप्ताह में एक-आध बार निभाते रहते हैं। सरकारी विभागों की पत्रिकाओं की बात करें तो उन पर भी सरकारी, विशेषकर राजनीतिक दवाब इतने रहे कि कुछ तो निकलते ही दम तोड़ गई और कुछ का विशुद्ध रूप से सरकारीकरण हो गया। लेकिन जिन विभागों, अकादेमियों में साहित्यकार बन्धु संपादक के रूप में आए, निःसंदेह उन्होंने बिना दवाब के अच्छी पत्रिकाएँ हिन्दी साहित्य को दीं।

 

हिमाचल प्रदेश की बात करें तो सरकारी विभागों की पत्रिकाओं की स्थिति यहाँ भी कुछ बेहतर नहीं रहीं। कुछ राजनीति का शिकार होती रहीं और कुछेक संपादकों की कुंठाओं से घिसटती-पिटती निकल रही हैं। लेकिन इस भीड़ में एक ऐसी पत्रिका वर्ष १९५५ से नियमित रूप से निकलती रही जिसने न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी अपनी पहचान बनाई। यह पत्रिका है हिमप्रस्थ जिसे प्रदेश सरकार का सूचना एवं जन स्म्पर्क विभाग निकाल रहा है। इस पत्रिका ने साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में खूब नाम कमाया है और हिन्दी साहित्य को कई लेखक और आलोचक भी दिए हैं। नए लेखकों के लिए तो यह पत्रिका एक संजीवनी की तरह हैं। आज जिस तरह से यह पत्रिका निकल रही है उसमें न केवल प्रदेश के छोटे-बड़े लेखक छप रहे हैं बल्कि देश के लेखक भी इसमें सम्मान से छप रहे हैं। केशव और बद्रीसिंह भाटिया दो ऐसे लेखकों के नाम इस पत्रिका के साथ जुड़े रहे जिन्होंने इस पत्रिका का सरकारीकरण नहीं होने दिया और कई बेहतर कहानी विशेषांक निकाले जिनकी देश-प्रदेश में खूब चर्चा हुई। प्रारम्भ में इस पत्रिका के चर्चित संपादकों में जिया सिद्धीकी, सत्येन शर्मा और राम दयाल नीरज के नाम भी जुड़े रहे जिन्होंने विदेशों तक के लेखक इससे जोड़े।

 

केशव और बद्रीसिंह भाटिया के सेवानिवृत होने पर सभी के मन में यह सवाल अवश्य था कि क्या यह पत्रिका अपनी साहित्यिक पहचान पहले जैसी कायम रख पाएगी। लेकिन साहित्यकार संपादकों ने जो आधारभूमि इस पत्रिका की बनाई थी उसके बाद भी पत्रिका ने वही साख बनाए रखी और कई महत्वपूर्ण विशेषांक साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में निकाले जो बेहद चर्चित हुए। पिछले तीन सालों से इसके प्रधान संपादक श्री बी डी शर्मा हैं जो सूचना एवं जन सम्पर्क के निदेशक भी रहे हैं। वरिष्ठ सम्पादक आर एस नेगी हैं। इस पत्रिका का सम्पूर्ण कार्यभार संपादक श्री रणजीत सिंह राणा पर है और उनके सहयोगी सहायक संपादक हैं वेद प्रकाश और सतपाल। अपने संपादकत्व में रणजीत सिंह राणा ने सबसे अच्छा काम यह किया है कि उन्होंने प्रदेश के नए-पुराने लेखकों को तो अपने साथ जोड़ा ही है लेकिन देश के लेखकों से भी बराबर सम्पर्क बनाया है और जिसके कारण हर अंक अपने आप में एक विशेषांक बनता रहा है। सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग प्रदेश सरकार का एक महत्वपूर्ण विभाग होता है। हिमप्रस्थ के साथ इस विभाग का गिरिराज साप्ताहिक भी निकलता है जो सरकार की समग्र गतिविधियों के प्रचार-प्रसार का उत्तरदायित्व निभा रहा है। लेकिन हिमप्रस्थ ने साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में अपनी भूमिका बखूबी निभाई हैं। आज ये दो ऐसे प्रकाशन हैं जो न केवल प्रदेश के दूर-दराज क्षेत्रों में पहुँचते हैं। लगातार ४३ वर्ष से छप रही इस पत्रिका ने एक लम्बी दूरी तय की है और प्रदेश की यह पहली पत्रिका है जो प्रदेश व देश के लेखकों में अति लोकप्रिय है और दूसरी सरकारी पत्रिकाओं की तरह कभी भी विवाद में नहीं रही हैं।

 

इन दिनों प्रदेश के मुख्य मन्त्री प्रो० प्रेम कुमार धूमल स्वयं एक लेखक हृदय हैं और उम्मीद की जा सकती है कि उनके कार्यकाल में यह पत्रिका साहित्य के क्षेत्र में और उन्नति करेगी।

शीघ्र ही इस पत्रिका को इन्टरनेट पर भी आप देखेंगे।

आप इस पत्रिका के लिए कहानियाँ और आलेख डाक या मेल से भेज सकते हैं जिनके पते निम्न दिए जा रहे हैं।

 

श्री रणजीत सिंह राणा, सम्पादक-हिमप्रस्थ, हिमाचल प्रदेश प्रिंटिग प्रेस परिसर, घोड़ा चौकी, शिमला-१७१००५

फोन-०१७७-२८३०३७४,

E-mail: girirajhp@gmail.com

 


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