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09.24.2007
 
श्रीनिवास श्रीकांत का नया कविता संग्रह - बात करती है हवा
एस. आर. हरनोट

श्रीनिवास श्रीकांत

 

वरिष्ठ कवि और आलोचक श्रीनिवास श्रीकांत का नया कविता संग्रह बात करती है हवा हाल ही में प्रकाशित हुआ है। इस संग्रह में उनकी २७ कविताएँ शामिल हैं। उनका एक अन्य कविता संग्रह घर एक यात्रा है शीघ्र ही प्रकाशित हो रहा है। इन कविताओं में अनेक रंग शामिल हैं जिनमें पंछी, गाँव की यादें, इन्तजार, पेड़, पत्थर, शराबघर में बूढ़े, नियति से लेकर बगदाद और अफगान तक के भयावह त्रास्दिक बिम्ब शामिल हैं। उनका यह संग्रह एक अन्तराल के बाद आया है, हालांकि वे पिछले कुछ सालों से निरन्तर प्रदेश व देश की श्रेष्ठ साहित्यिक पत्रिकाओं में छपते रहे हैं। पिछले दिनों उनके आलोचनात्मक आलेख, अनुवाद और कविताएँ आलोचना, पहल, कथन, पल प्रतिपल, वागार्थ, ज्ञानोदय, वसुधा, अकार, समकालीन भारतीय साहित्य, वर्तमान साहित्य, उत्तर प्रदेश, अन्यथा, शिखर, विपाषा, हिमप्रस्थ में प्रकाशित हुई हैं। कथन के नए अंक में तो उन्हें विशेष प्रस्तुति के अन्तर्गत विशिष्ट कवि के रूप में छापा गया है जिसमें उन पर प्रख्यात साहित्यकार प्रो० दूध नाथ सिंह की एक महत्वपूर्ण टिप्पणी भी है। वे उनकी कविताओं के संदर्भ में लिखते हैं कि श्रीनिवास की भाषा अधूरे संवादों की भाषा है, जिसमें जितना कथित होता है, उससे ज्यादा अंतर्कथित। कविता की भाषा में आजकल कई रंग दिखायी देते हैं। अंतर्कथित में संकेत अधिक होते हैं। ऊपर से खुलते नहीं, उन्हें अंदर से निकालना पड़ता है। उनकी कविताओं में भाव और लय की एक अजीब अंतर्धारा है। श्रीनिवास ने अधिकतर जीवन लेखन से बाहर जीया है लेकिन उनका अध्ययन कभी कम नहीं हुआ है। वे जितना भारतीय साहित्य पढ़ते हैं उससे कहीं ज्यादा विदेशी साहित्य। इसलिए वे कविता, आलोचना के साथ अनुवाद में भी सक्रिय है।

१२ नवम्बर, १९३७ में दिल्ली में जन्में श्रीनिवास श्रीकांत ने स्नातक की शिक्षा पंजाब विश्वविद्यालय से पाई है। नियमि, इतिहास और जरायु कविता पुस्तक के साथ एक भूखण्ड उनका संपादित कविता संकलन है। समय के साथ उनकी आलोचना पुस्तक छपी है। कविताओं के लिए वर्ष १९९८ में राष्ट्रीय हिंदी अकादमी रूपाम्बरा द्वारा राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर राष्ट्रीय साहित्य सम्मान मिल चुका है।  वे हिमाचल में हिन्दी के लेखकों में पहले ऐसे लेखक हैं जिन्होंने हिमाचल अकादमी पुरस्कार लेने से मना कर दिया था। वर्ष १९९५ में लोक संपर्क अधिकारी के रूप में वे हिमाचल प्रदेश सरकार से सेवानिवृत हुए हैं और इन दिनों स्वतंत्र लेखन, पत्रकारिता और साहित्यिक परामर्श के साथ वे हिमाचल की हिन्दी पत्रिका जनपक्ष मेल में बतौर संपादक सेवा दे रहे हैं।  इन दिनों श्रीनिवास जी कथा में पहाड़ वृहद् कथा संकलन के संपादन के साथ कुर्छ आलोचनात्मक पुस्तकों के लिखने में व्यस्त हैं।

 



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