विद्यार्थी व्यथा रोली त्रिपाठी
चैन से रहते खाते पीते न किताबें होतीं न एग्जाम होते
शिक्षकों की फटकार प्रधानाचार्य का दुलार भुला कर सोते न किताबें होतीं न एग्जाम होते
फूलों के साथ काँटे रहेंगे ये एग्जाम हमें यूँ ही सताते रहेंगे
हम हमेशा हँसते कभी न रोते न किताबें होतीं न एग्जाम होते