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03.02.2008
 

राजनीतिज्ञ
रोली त्रिपाठी


माँ के मन में आयी
बेटे का भविष्य
जानने की आस
तो लेकर बेटे को
माँ पहुँची ज्योतिषी के पास

माँ बोली - महाराज
इसका हाथ देख भविष्य
बताइये
पढ़ाई में मन लगाये इसे समझाइये!

बेटे का हाथ देख ज्योतिषी
मुस्काया -
फिर विस्तारपूर्वक माँ को बताया

पढ़ना लिखना तो मात्र संयोग है
इसके हाथ में तो
राजनीतिज्ञ बनने का योग है
आपका पुत्र घोटाले कर
बहुत धन कमाएगा
जिससे आपका सारा कष्ट
मिट जाएगा

महाराज आप कहते हैं कि
मेरा पुत्र घोटाले कर धन कमाएगा
क्या अपने हितों के लिए यह
इतना स्वार्थी हो जाएगा”

“देवी जी इसे स्वार्थ नहीं कहते हैं
फिर थोडे़ बहुत दाँव पेंच तो
राजनीति में रहते हैं”

“मेरा पुत्र ठेला चलाएगा
लेकिन अपने देश का धन
नहीं चुराएगा”

देवी जी आप बेकार में
हो रही हैं गरम
राजनीति में भ्रष्टाचार से
भला कैसी शरम
राजनीति में बहुत नाम करेगा
आपका बेटा
जो जितना करे घोटाला
उतना ही बड़ा नेता

महाराज लाल बहादुर भी तो
भारत माँ के लाल थे

परन्तु देवी जी उस जमाने में
नहीं इतने जंजाल थे
तब लोग थोड़े में ही
संतुष्ट रहते थे
हमने खाई नमक रोटी
शान से कहते थे
वर्तमान राजनीति की बात छोड़िये
यहाँ तो लोग चारा भी खा जाते हैं
और बड़े शान से यह बात
मीडिया को बताते हैं

महाराज क्या देशवासियों में
देशभक्ति गयी है मर

अरे नहीं देवी जी
भावना तो है अमर
परन्तु भावना पर हावी है स्वार्थ
हमें चाहिए ऐसा नेता
जो हो निश्छल और निस्वार्थ

महाराज अगर ऐसी बात है
तो मेरा बेटा राजनीतिज्ञ ही बनेगा
लेकिन वो भ्रष्टाचार में नहीं
ईमानदारी में देश का
नाम रोशन करेगा


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