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ISSN 2292-9754

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05.31.2016


पिता और स्वतंत्र होती बेटी

पिता ने
स्वतंत्र होती बेटी को
स्कूल को जाते
और
लौटते हुए देखा
कभी
सहेलियों के साथ
पिकनिक की ज़िदकर
सुंदर-सी गुड़िया की तरह
तैयार होते देखा
ट्यूशन से
लौटने में देरी होने पर
दरवाजे को पकड़
आशंकाओं से त्रस्त-ग्रस्त हो
ख़ुद को भयभीत होते देखा
अब से पहले
कहाँ कभी सोचा था
यह स्वतंत्र होती बेटी
एक निडर, अभिमानी
आक्रामक पुरुष को
इतना बेबस, कमज़ोर
और
लाचार बना देगी‌।


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