अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
05.31.2016


मेरे सवाल

मैं पूछना चाहती थी
सवाल
द्रोपदी, सीता, अहिल्या
और
कस्तूरबा से
या
उनके जैसी अन्य स्त्रियों से

द्रोपदी
पाँच पति की पत्नी होना
तुम्हारा था ये फैसला
यदि नहीं था
तो कैसा था ये स्वीकार
द्रोपदी कुछ तो कहो------

सीता
तुमने क्यों दी अग्निपरीक्षा
और क्यों उतार दिया?
घर का सुरक्षाकवच
सीता तुम क्यों कुछ नहीं बोलती हो?
राम की पत्नी होने का था ये सबब
या
जाग रही थी
तुम्हारे भीतर की स्त्री

अहिल्या
पत्थर की शिला बनकर
क्यों सहती रही?
बिना पाप का अभिशाप
क्यों करती रही प्रतिक्षा?
किसी के पैरों की
फिर कौन-सी मुक्ति थी वो
स्वयं से या इस समाज से
जो सदा से इंद्र या गौतम का ही था।

कस्तूरबा
गांधी की महानता में तुम
कहाँ थी खड़ी?
वो बढ़ते रहे आगे
तुम छूटती रही पीछे
तुम पत्नी होकर भी
नहीं थी पत्नी
अगर थी तो
कभी तो करती प्रतिकार
या
उनके हर फैसले में था
तुम्हारा स्वीकार
बा
कुछ तो कहो?


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें