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ISSN 2292-9754

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05.31.2016


लड़की और संतरंगी सपने

लड़की ने इठलाकर कहा
"मैं सुंदर हूँ।"

प्रकृति हँसी
हवा बह चली
और वह
सुंदरता को सार्थक करने
आगे बढ़ आया

लड़की मुग्ध हो
उसके साथ चल दी।

साथ में संतरंगी स्वप्न भी चले।

उसने मन-भर सुंदरता को सार्थक किया।

प्यार के पाठ पढ़ाये
सिद्धांत गढ़े
लैला मजनू, शीरी-फरहाद
के उदाहरण दिए

लड़की चकित भाव से
देखती रही उसे
कोशिश करती रही
समझने की उसे

तभी अचानक
याद आया उसे घर
याद आयी पत्नी
याद आए बच्चे
लड़की को बाँध
प्यार की रस्मों-कसमों में
वह लौट गया घर

रह गयी लड़की
प्यार की रस्मों-कसमों के साथ
संतरंगी सपनों
को हवा में टाँग
अनंत प्रतीक्षा में लीन।


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