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ISSN 2292-9754

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05.12.2017


इंसानियत़

छोटे से बच्चे को गोद में उठाए एक औरत बदहवास सी सड़कों पर फिर रही थी। बिखरे बाल, कपड़े अस्त-व्यस्त,चेहरे पर थकान के भाव थे। उसे चिंता थी तो बस अपने बच्चे की जो उस वक़्त भूख से बिलख रहा था। वो दौड़ती हुई एक गाड़ी के पास गई और कहा, "बाबूजी कुछ पैसे दे दो बच्चे को दूध पिलाना है।"

"ऐ हट पीछे," एक कर्कश सा स्वर सुनाई दिया। "गंदे हाथों से छूकर गाड़ी को भी गंदा करेगी।"

"बाबूजी आपके हाथ जोड़ती हूँ, थोड़े से दूध के पैसे दे दो," गिड़गिड़ाने वाले स्वर में औरत ने कहा।

तभी ड्राइवर नीचे उतरा और दूध का पैकेट लेकर आया, औरत नेआशा भरी नज़रों से उसे देखा, उसके चेहरे पर ढेर सारी दुआओं व धन्यवाद के भाव उमड़ गए।

तभी उस आदमी ने पैकेट खोलकर अपने पास गाड़ी में बैठे अपने कुत्ते को पिला दिया और ऐसे स्नेह जताने लगा जैसे उसका बेटा हो।

औरत अवाक रह गई, उसकी आशाएँ बुझ गईं आँखों में आई चमक उदासी में बदल गई,वो लौट ही रही थी कि एक छोटा सा बच्चा गाड़ी में से उतरा और उसने अपनी दूध की बोतल उसे थमा दी। औरत की आँखों से आँसू आ गए। आज पिता द्वारा कुचल दी गई इंसानियत को उस बच्चे ने फिर से ज़िंदा कर दिया था।


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