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| 06.21.2008 |
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रमज़ान बीता तो रवायत बदल गई |
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रमज़ान बीता तो रवायत बदल गई, वो क़त्ल करते हैं तो देते हैं क़फ़न भी मैं अपने बयानों का पाबन्द रहा मगर जहाँ सराय तय थी वहाँ बंगले बन गए बचपन में बोझ से कांधे टूटते रहे |
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