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06.21.2008
 

रमज़ान बीता तो रवायत बदल गई
ऋतेश त्रिपाठी "मंथन"


रमज़ान बीता तो रवायत बदल गई,
ख़ुदा वो ही है मगर इबादत बदल गई,

वो क़त्ल करते हैं तो देते हैं क़फ़न भी
कौन कहता है शरीफ़ों की शराफ़त बदल गई

मैं अपने बयानों का पाबन्द रहा मगर
मुंसिफ़ बदल गये तो कभी अदालत बदल गई

जहाँ सराय तय थी वहाँ बंगले बन गए
ईंटें हैरान हैं कि कैसे इमारत बदल गयी

बचपन में बोझ से कांधे टूटते रहे
वारिस जवान हुए तो विरासत बदल गई


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