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10.16.2007
 
चक दे ट्वंटी ट्वंटी
रेणू अहूजा

सचमुच रोमांच ,गले पर लटकती तलवार सा मैच
ऐसा अहसास, हर बाल तलवार की धार
जोहान्सबर्ग जैसे शतरंज की बिसात
जाने किसे मिलेगी शह और मात

हुई जीत आखिरकार
एक शानदार यादगार
हिन्दुस्तानियों के लिए
गौरव की मिसाल
दिल्ली में जशन का ऐसा था माहौल
कि लोग लिये सड़क पर ढोल थाल परात
समझ लो, जो लगा जिसके हाथ..

झूमते गाना "हाँ वर्ल्ड कप ले लिया"
भला हो उस कैच का जिसने सारा रुख बदल दिया
जाने ये जुनून कैसा है, जिसने सबको एकरंग बना लिया
कि मुँह से रोके ही नहीं रुक रहा ये..."चक दे इंडिया"


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