अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
12.06.2014


एक साल बीत गया

जीवन की नदिया में
जैसे कुछ रीत गया
एक साल बीत गया

भावों की गठरी में
अनुभव के पल लेकर
कुछ मीठे, कुछ खट्टे
कुछ कड़वे फल देकर
वक्त इस लड़ाई में
देखो फिर जीत गया
एक साल बीत गया

आँखों की कोरों से
बहते गंगाजल सा
दुनिया भर में फिरते
आवारा बादल सा
बरसा जब आँगन में
तन-मन सब भीग गया
एक साल बीत गया

यादों के गुलमोहर
खिलते और मुरझाते
द्वारे सूखे तोमर
फिर मन को समझाते
लौट आएगा वापिस
वो मन का मीत गया
एक साल बीत गया


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें